Indian Union and Territory
भाग-1 संघ और उसका राज्यक्षेत्र
क्या आप जानते हैं की भारत को union of states क्यूँ कहा जाता है, federation क्यूँ नहीं?
और संसद किस अनुच्छेद के तहत नए राज्य बना सकती है या सीमाएं बदल सकती है?
आइए भारतीय संविधान के भाग 1 को बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे।
भारतीय संविधान को कुल 22 भागों में बांटा गया है।
इनमें भाग 1 देश की भौगोलिक संरचना और राज्यों की व्यवस्था को स्पष्ट करता है।
इस भाग में कुल 4 अनुच्छेद हैं।
अनुच्छेद 1
संघ का नाम और राज्यक्षेत्र की बात करता है- इसके अनुसार भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा, राज्य और उनके राज्यक्षेत्र वे होंगें जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, और भारत के राज्यक्षेत्रों में-राज्यों के राज्यक्षेत्र , पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट संघ राज्यक्षेत्र और ऐसे अन्य राज्यक्षेत्र जो अर्जित किए जाएँ समाविष्ट होंगे।
अनुच्छेद 2
की बात करें तो वह नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना की बात करता है- इसके अनुसार संसद विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों जो वह ठीक समझे संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 की आवश्यकता नहीं होती है। इसी अनुच्छेद के तहत सिक्किम को भारत का 22 वां राज्य बनाया गया।
अनुच्छेद 3
नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों , सीमाओं या नामों में परिवर्तन का प्रावधान करता है- अर्थात अनुच्छेद 3 भारत के अंदर राज्यों के पुनर्गठन और उनके स्वरूप में बदलाव करने की शक्ति संसद को देता है जिससे देश की प्रशासनिक इकाइयों को आवश्यकतानुसार बदला जा सके जैसे तेलंगाना राज्य का गठन हुआ।
अनुच्छेद 4
कहता है की संसद अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों के लिए पहली और चौथी अनुसूची में आवश्यकतानुसार बदलाव कर सकती है और इन बदलाव को संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा जिससे संसद साधारण बहुमत से राज्यों का पुनर्गठन कर सकती है।
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