Indian Citizenship

भारतीय राज्यव्यवस्था: भाग-2 नागरिकता

नागरिकता वह कानूनी स्थिति है जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति किसी देश का स्थायी सदस्य माना जाता है। नागरिकों को उस देश में अधिकार मिलते हैं और साथ ही कर्तव्यों का पालन भी करना होता है।

भारतीय संविधान के भाग 2 अनुच्छेद 5-11 तक नागरिकता का प्रावधान कीया गया है।

अनुच्छेद-5:

संविधान लागू होते समय नागरिकता (1950): संविधान लागू होने के बाद निम्न आधार पर नागरिकता दी गई जैसे :

• जो व्यक्ति भारत में जन्मा,
• या जिसके माता-पिता भारत में जन्मे,
• या जो कम से कम 5 वर्ष से भारत में रह रहा हो,

वह भारत का नागरिक माना जाएगा।

अनुच्छेद-6:

पाकिस्तान से भारत आए व्यक्ति

• जो व्यक्ति पाकिस्तान से भारत आया,
• और 19 जुलाई 1948 से पहले आया → स्वतः नागरिक
• 19 जुलाई 1948 के बाद आया → पंजीकरण आवश्यक

अनुच्छेद-7:

भारत से पाकिस्तान गए व्यक्ति

• जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान चला गया,
• वह सामान्यतः भारतीय नागरिक नहीं माना जाएगा,
• लेकिन यदि पुनः लौट आया और अनुमति मिली हो, तो अपवाद संभव है।

अनुच्छेद- 8:

विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति

• जो व्यक्ति भारत के बाहर रहता है,
• लेकिन उसके माता-पिता/पूर्वज भारत में जन्मे,
• तो वह भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराकर नागरिक बन सकता है।

अनुच्छेद -9:

विदेशी नागरिकता लेने पर

• यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ले ले,
• तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी।

अनुच्छेद 10:

नागरिकता की निरंतरता

• जो व्यक्ति अनुच्छेद 5–8 के अंतर्गत नागरिक है,
• उसकी नागरिकता तब तक बनी रहेगी,
• जब तक संसद कोई कानून न बनाए।

अनुच्छेद 11:

संसद की शक्ति

• संसद को अधिकार है कि वह
o नागरिकता देने,
o समाप्त करने,
o या नियंत्रित करने के लिए कानून बनाए।इसी के अंतर्गत Citizenship Act, 1955 बनाया गया।

Note: भारत में दोहरी नागरिकता नहीं है

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