चंपारण आंदोलन का उद्देश्य और कारण
चंपारण आंदोलन (1917) का मुख्य उद्देश्य नील की खेती करने वाले किसानों को ब्रिटिश ज़मींदारों और यूरोपीय नील उत्पादकों के शोषण से मुक्त कराना था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह आंदोलन किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू किया गया था।
चंपारण आंदोलन के कारण:
- तीन कठिया प्रथा: ब्रिटिश सरकार ने बिहार के किसानों को मजबूर किया कि वे अपनी ज़मीन के 3/20 हिस्से पर नील की खेती करें, जिससे उन्हें भारी नुकसान होता था।
- किसानों का शोषण: ज़मींदार जबरदस्ती नील की खेती करवाते थे और किसानों को बहुत कम दाम चुकाते थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही थी।
- अन्यायपूर्ण कर एवं अत्याचार: अंग्रेज़ किसानों से मनमाने कर वसूलते थे और विरोध करने पर उन पर अत्याचार किया जाता था।
- बदलते हालात: जब जर्मनी में सिंथेटिक नील का उत्पादन शुरू हुआ, तो यूरोपीय ज़मींदारों ने भारतीय किसानों से जबरन भारी मुआवजा वसूलना शुरू कर दिया।
- गांधीजी का हस्तक्षेप: स्थानीय किसानों की दुर्दशा सुनकर महात्मा गांधी चंपारण पहुँचे और सत्याग्रह के माध्यम से अंग्रेज़ों के अन्याय का विरोध किया।
नतीजा:
गांधीजी के प्रयासों से सरकार ने किसानों की समस्याओं को सुना और नील की खेती की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। यह भारत में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहला सफल सत्याग्रह था और इससे स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली।
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