भारत में यूरोपियों का आगमन
यूरोपियों का भारत आगमन 15 वी शताब्दी मे हुआ,तब यूरोप मे पुनर्जागरण का दौर चल रहा था और भौगोलिक खोज की जारही थी, भारत की अर्थव्यवस्था काफी शक्तिसाली थी,और भारत पूरे विश्व मे सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था, भारत से मसाले खासकर काली मिर्च,कपड़े तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना यूरोपियों के लिए आर्थिक रूप से बहुत लाभदायक थी। हालांकि यूरोप का भारत के साथ स्थल मार्ग से व्यापार होते थें,लेकिन जब कुसतुंतुनीय पर अरबों का अधिकार हो गया तो स्थल मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। इसी समय कोलंबस नामक युरोपियन व्यक्ति भारत की खोज करने निकला और वह अमेरिका पहुँच गया,इस प्रकार कोलंबस ने अमेरिका की खोज की। यूरोपियों के भारत आने का उद्देश्य यह व्यापार करना और अधिक से अधिक लाभ कमाना और साथ ही उपनिवेश की स्थापना करना था।
भारत आने वाला पहला युरोपियन पुर्तगाली थें, 1498 ई. मे वास्को-डी-गामा अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप होते हुए केरल के कालीकट बंदरगाह पहुँच। इसके बाद डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी भारत आय। केरल के राजा जमेरिन ने वास्को-डी-गामा का भव्य स्वागत किया था।
- 1505ई. मे फ्रांसिस्को-द-अल्मेडा भारत का प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया, इसी के द्वारा ब्लू वाटर पॉलिसी चलाई गई थी, जिसका उद्देश्य हिन्द महासागर मे अपने नौसैनिक प्रभुत्व को स्थापित करने और व्यापारिक मार्गों को नियंत्रित करने के लिए अपनाई गई थी।
- 1509ई. मे अलफाँसों द अलबुकर्क भारत मे पुर्तगाली का वायसराय बना, इसने बीजापुर के यूसुफ आदिल शाह से गोवा को जीत।
- पूर्तगलियों ने अपनी पहली कोठी कोचीन मे खोली थी।
डच:
पूर्तगलियों के बाद डच भारत आया दकहों ने भारत मे अपनी पहली कोठी 1605ई. मे मसूलिपट्टम मे स्थापित की,इसकी दूसरी व्यापारिक कोठी पुलिकट मे स्थापित हुई।
- 1759 मे हुए अंग्रेज और दकहों के बीच वेदर युद्ध के बाद भारत मे दकहों का अंतिम रूप से पतन हो गया।
अंग्रेज:
अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600ई मे हुई उस समय भारत मे अकबर का शासन था, महरानी एलिजाबेथ के एक चार्टर द्वारा अंग्रेजों को पूर्व मे व्यापार करने का अधिकार मिल गया। अंग्रेज आय तो यह व्यापारी बन कर लेकिन धीरे धीरे उसने पूरे भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया जो पूरे 200 सालों तक चला।
- कैप्टन हॉकिंस प्रथम अंग्रेज था जो 1609ई. मे जेम्स प्रथम का राजदूत बनकर मुगल शासक जहांगीर के दरबार में गया था। इसका उद्देश्य यूरोपियों को भारत मे व्यापार करने के लिए अनुमति लेना था,लेकिन पूर्तगलियों के विरोध के कारण ये असफल रहा।
- 1613 ई. मे जहांगीर ने एक फरमान जारी कर अंग्रेजों को सूरत मे व्यापार करने की अनुमति दे दी। भारत में पहला कारखाना (Factory) → सूरत (1613 ई.) में।
- 1615 मे सम्राट जेम्स प्रथम ने सर टॉमस रो को अपना राजदूत बना कर जहांगीर के दरबार मे भेजा, रो अंग्रेजों के लिए कुछ व्यापारिक छूट प्राप्त करने मे सफल रहा।
- धीरे-धीरे अंग्रेज भारत मे अपना पैर पसरते गये,और पूरे भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित करने मे सफल रहा
फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 मे हुई,भारत मे फ़्रांसीसियों की प्रथम कोठी सूरत मे 1668 मे स्थापित हुई।
- प्रथम कर्नाटक युद्ध 1746-48 मे अंग्रेज और फ़्रांसीसियों के बीच हुआ जिसका कारण था आस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध यह युद्ध ए-ला-शापल की संधि के साथ समाप्त हुआ।
- दूसरा कर्नाटक युद्ध 1749-54 तक हुआ,इस युद्ध मे अंग्रेजों ने फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले को हराया,पांडिचेरी की संधि के बाद ये युद्ध समाप्त हो गया।
- तीसरा कर्नाटक युद्ध 1756-63 के बीच हुआ और पेरिस की संधि होने पर यह युद्ध समाप्त हो गया।
- 1760 मे अंग्रेजी सेना ने आयरकुट के नेतृत्व मे वांडिवाश के युद्ध में फ़्रांसीसियों को हराया। अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ़्रांसीसियों से छीन लिया। 1763 मे पेरिस संधि के द्वारा अंग्रेजों ने चंद्रनगर को छोड़कर अन्य सभी प्रदेशों को फ़्रांसीसियों को लौटा दिया जो भारत की आजादी तक फ़्रांसीसियों के कब्जे मे रहा।
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