Preliminary Examination Strategy

प्रारंभिक परीक्षा की रणनीति

UPSC प्रिलिम्स परीक्षा 2025 काफी नजदीक है। इस क्रम में अधिकांश उम्मीदवार किताबें पढ़ने, नोट्स बनाने, कक्षाएँ लेने एवं मॉक टेस्ट देने के रूप में सक्रिय रूप से तैयारी में लगे हुए हैं और इन सभी में इस परीक्षा के लिये खुद को मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करना, सबसे निर्णायक पहलू है। हम हजारों उम्मीदवारों की सहायता करने के अपने वर्षों के अनुभव के आलोक में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें साझा करना चाहते हैं।

UPSC प्रिलिम्स परीक्षा में आपकी सहायता हेतु कुछ समग्र निर्देश निम्नलिखित हैं:

1. विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs): ध्रुव तारा (दिशा निर्देशक)

  • UPSC प्रिलिम्स परीक्षा के पाठ्यक्रम की व्यापक समझ विकसित करना चाहिये क्योंकि इससे आपकी पूरी तैयारी को मार्गदर्शन मिलेगा। इस परीक्षा की आवश्यकताओं को समझने के लिये परीक्षा के पाठ्यक्रम का गहन विश्लेषण करना आवश्यक है।
  • PYQ का विश्लेषण करने से आप प्रश्न प्रारूप के साथ विषयों एवं पाठ्यक्रम के विभिन्न भागों की महत्ता से परिचित होते हैं।
    • PYQ से आपको UPSC द्वारा बार-बार दोहराए जाने वाले विषयों एवं बिदुओं के बारे में पता चलता है। इससे आपको प्राथमिकता वाले विषयों के साथ अपने समय आवंटन को अनुकूलित करने में सहायता मिलती है।
    • परीक्षा कक्ष की परिस्थितियों में PYQ को हल करने से परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन हेतु रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलती है।

2. स्वयं की अध्ययन योजना बनाना:

  • अध्ययन का ऐसा कोई एक तरीका नहीं है जो सभी के लिये उचित हो। अपनी मज़बूती एवं कमज़ोरियों के साथ उपलब्ध समय के अनुसार एक अध्ययन योजना बनानी चाहिये।
  • प्रत्येक विषय हेतु संतुलित समय आवंटन के साथ यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि रिवीज़न के लिये पर्याप्त समय हो। याद रखें कि इस परीक्षा में सफल होने के लिये निरंतर रिवीज़न करना बहुत ज़रूरी है।
  • अपनी तैयारी के दौरान आवश्यकता के अनुसार लचीला होने के साथ अपनी योजना को बदलने हेतु तैयार रहें।

3. अध्ययन के आधार को मज़बूत बनाना:

  • NCERT की पाठ्यपुस्तकें इस तैयारे की गहना हैं! इनके माध्यम से अपनी तैयारी के आधार को मज़बूत बनाना चाहिये।
    • PYQs से NCERT की महत्ता को देखा जा सकता है, उदाहरण के लिये, प्रतिवर्ष राजव्यवस्था से कम से कम 2 से 3 प्रश्न सीधे 11वीं कक्षा की NCERT से पूछे जाते हैं।

4. करेंट अफेयर्स को तैयार करना:

  • करेंट अफेयर्स डायनमिक होने के साथ प्रारंभिक परीक्षा के लिये निर्णायक है क्योंकि UPSC द्वारा अक्सर उन विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं जो समाचारों में रहे हों।
    • उदाहरण के लिये प्रारंभिक परीक्षा में भौगोलिक स्थानों से संबंधित प्रश्न करेंट अफेयर्स से संबंधित होते हैं।

5. CSAT (GS-2) पेपर की उपेक्षा  करना:

  • CSAT पेपर से आपके तर्क, समझ, निर्णय निर्माण तथा बुनियादी संख्यात्मकता योग्यता का परीक्षण किया जाता है। वर्ष 2023 में CSAT (GS – 2) पेपर से अनेकों उम्मीदवारों को निराशा हुई जिसके कारण यह GS – 1 में अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सके।
    • CSAT की तैयारी के लिये, विगत वर्षों के पेपर का अभ्यास करने के साथ मॉक टेस्ट हल करना आवश्यक है।

6. रिवीज़न को महत्त्व देना:

  • अपनी जानकारी को बनाए रखने के क्रम में अध्ययन किये गए विषयों का नियमित रूप से रिवीज़न करना चाहिये। इसमें निश्चित अंतराल पर रिवीज़न के साथ सक्रिय स्मरण जैसी तकनीकें सहायक हो सकती हैं।
  • परीक्षा के दौरान तीव्र रिवीज़न हेतु समग्र नोट्स या माइंड मैप बनाना आवश्यक होता है।

7. अपने स्रोतों को सीमित रखना:

  • बहुत अधिक अध्ययन सामग्री पर ध्यान देने के बजाय सीमित समय में पहले से अध्ययन किये गए स्रोतों का रिवीज़न करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।
  • अध्ययन की मात्रा की तुलना में उसकी गुणवत्ता पर बल देना चाहिये। कई किताबों को एक बार पढ़ने की तुलना में एक ही किताब को 3-4 बार दोहराना काफी ज़्यादा प्रभावी होता है।

8. मॉक टेस्टसफलता हेतु रिहर्सल:

  • परीक्षा के माहौल को समझने तथा संबंधित विषयों में सुधार की आवश्यकता का पता लगाने के लिये नियमित रूप से मॉक टेस्ट देना निर्णायक होता है।
  • प्रत्येक टेस्ट के बाद अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करने तथा अपनी मज़बूती तथा कमजोरियों को समझने के साथ उन पर रणनीतिक रूप से कार्य करना आवश्यक है।

विदित हो कि UPSC प्रिलिम्स परीक्षा को उत्तीर्ण करने हेतु तीन-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है: बेहतर अध्ययन योजनानिरंतर प्रयास तथा उचित संसाधन। उपर्युक्त दिशानिर्देशों का पालन करके आप एक सिविल सेवक के रूप में अपने सपनों को साकार करने की दिशा में अग्रसर होंगे। हम सफलता के लिये आवश्यक कुछ अतिरिक्त पहलुओं पर बल देना चाहेंगे:

  • विचलन को कम करना फोन, टीवी एवं कंप्यूटर स्क्रीन पर सीमित समय व्यतीत करना चाहिये। केवल परीक्षा की तैयारी के लिये रणनीतिक रूप से इनका उपयोग करना चाहिये।
  • एकाग्रता की क्षमता हासिल करना एक समय में एक ही कार्य पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना चाहिये। इस केंद्रित दृष्टिकोण से आपके सीखने की समझ बेहतर होगी।
  • अध्ययन में आनंद खोजना यह एक सर्वविदित तथ्य है कि खुश होकर किसी कार्य को करने से सफलता आसान हो जाती है। UPSC की तैयारी में आनंद की भावना विकसित करनी चाहिये। सीखने की प्रक्रिया को दिलचस्प बनाने से आपकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

जैसा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि “अपने उद्देश्य में सफल होने के लिये आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रता से समर्पित होना चाहिये।” इसी भावना के साथ UPSC की तैयारी करने से आपकी सफलता की राह आसान हो जाएगी।

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